COMICS HAI MERA JUNOON

मित्रों ! इस पेज पर हम कॉमिक्स फैन्स के उन विचारों को जानेंगे जो कॉमिक्स के प्रति उनमें भरे हैं यानि हम जानेंगे उनके बचपन से अब तक के कॉमिक्स के सफ़र की दास्तान उन्हीं की जुबानी !


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कॉमिक्स और मैं अब तक Sat, Nov 25, 2017 at 9:50 AM
महेश कुमार (टिंकू माही)


हम सब लोगों की ये सेम लाइन होगी कि हमने कॉमिक्स अपने बचपन में पढ़ना शुरू किया था तो हां ऐसा मेरे साथ भी है मुझे अपने पहली कॉमिक्स का नाम तो ठीक से याद नहीं पर । जो करैक्टर मैंने उस कॉमिक्स में पढ़ा था । उसे हम सब गोजो के नाम से जानते हैं।
मैं अपने दोस्त जितेन्द्र के घर गया था जितेन्द्र अपने घर के अन्दर वाले कमरे में मैथ्स की किताब पढ़ रहा था मैंने उसे पढ़ता देखा तो मैं चौंक गया मैंने बोला भाईसाहब आप कब से पढ़ने लगे तो जितेंन्द्र ने मुझे मैथ्स की किताब के अन्दर गोजो की वो कॉमिक्स दिखाई जो वो चोरी चुपे पढ़ रहा था। ऐसा शायद हम सब ने अपनी जिन्दगी में किया ही होगा। इस चीज का एक अलग ही मजा था हैं न - तो जितेंन्द्र ने कॉमिक्स मुझे पढ़ने को दी और बोला ठीक से पकड़ना कोई भी पन्ना खराब नहीं होना चाहिए। जैसे जैसे मैं कॉमिक्स को पढ़ता जा रहा था वैसे वैसे आकर्षक चित्रों और शानदार संवादों से मैं कॉमिक्स में खोता जा रहा था। मुझे आज भी याद है उस सीन में गोजो एक बैलगाड़ी को रोक रहा था। जिसके बैल बेकाबू होकर एक बच्चे की तरफ बढ़ रहे थे वो बच्चा घर से बाहर सड़क पर खेल रहा था। गोजो ने तुरन्त अपने शरीर को पत्थर का बना दिया -जिसको हम सब संहारक के नाम से जानते है- और उस बैलगाड़ी को रोकने की कोशिश करने लगा पर वो बेकाबू बैल गोजो समेत कई सारे घरों को तोड़ते हूए काफी दूर जा कर रूक पाये दीवारों पर सर लगने से बैलों पर किया गया जादू टूट गया , गोजो ने कॉमिक्स में कई और रूप भी बदले और फिर गोजो ने विलन को खूब पीटा इस तरह गोजो ने मुझे अपना दीवाना बना लिया। 
उस समय कॉमिक्स को मैं 1 रूपए में किराए पर लेकर पढ़ा करता था , मेरा दोस्त जितेंद्र , जो मेरी ही तरह कॉमिक्स को लाइक करता था।  वो ज्यादातर कॉमिक्स का इंतजाम करता और हम दोनों भाई आराम से बैठकर बारी बारी से कॉमिक्स पढ़ते। मुझे याद है कॉमिक्स पढ़ने को लेकर हम दोनों में लड़ाई भी हो जाती थी। गोजो के बाद मैंने जिस करैक्टर की कॉमिक्स को पढ़ा वो था - तौसी - 
उस करैक्टर को बहुत ही अच्छे से डिजाइन किया गया था उसकी शक्तियां भी मस्त थी । आप सब भी मेरी इस बात से सन्तुष्ट होंगे । हां तो तौसी जी नाग थे पाताल लोक के नाग राजा- हम सब ने उस समय नगीना और निगाहें फिल्म देखी ही होंगी तो मेरा लगाव सा हो गया था नागों से ये बात बता दू सभी नागों से नहीं अच्छे नागों से जो इन्सानों की मदद करते उनकी तरह बात करते सबको काटते नहीं फिरते थे। तो उस करैक्टर ने मुझे कॉमिक्स की तरपु ऐसा मोड़ा कि आज तक मैं उस मोह से बाहर नहीं निकल पाया हुं। पिंकी , चाचा चौधरी, अंगारा इत्यादि की कॉमिक्स भी मैं समय समय पर पढ़ लेता था।
हमने तौसी गोजो की बात तो कर ली अब मैं आपको बताता हुं उस जुनून की जिसने मुझे आज तक उस बचपन से बाहर नहीं निकलने देता । ये करैक्टर थे राज कॉमिक्स के - नागराज और ध्रुव 
जहां तक मुझे याद आ रहा है मैं नानी जी की घर गर्मी की छुट्टी पर गया हुआ था, शाम के समय मैंने अपने मामा जी को एक कॉमिक्स को पढ़ते हुए देखा अब इतनी कॉमिक्स पढ़ चूका था तो देखते ही पहचान गया ये क्या है और अपनी जगह पर खड़े ही खडे़ उछल पड़ा । मैं तुरन्त उनके पास गया और मैँने उनसे कहा कि मुझे भी पढ़ने को ये चाहिए । मामा जी ने कुछ देर बाद मुझे कॉमिक्स पढ़ने को दी। वो कॉमिक्स राज कॉमिक्स की सबसे बड़ी हीरो नागराज की थी जिसमें वो नागदंत की पीटाई कर रहा था। नागराज के हाथों से नाग निकते थे उस समय नागराज के पार आज की तरह शक्तियां नहीं थी पर वो शक्तिशाली था उसे कोई काट नहीं सकता था कोई काटता तो तुरन्त गल जाता था उसके पास कालजयी के विष की शक्ति थी इत्यादि
थौडागा , नागराज का इंतकाम ,कोबराघाटी , नागराज और कालदूत इत्यादि कॉमिक्स मैंने उन दो महीने की छुट्टी में पढ़ी
इस दौरान मैंने केवल नागराज की ही नहीं बल्कि ध्रुव की भी कॉमिक्स पढ़ी - ध्रुव मेरा आज भी फेवरेट है क्यो ये नही जानता पर उसको बनाया ही ऐसा गया है कि कोई भी उसका दीवाना बन जाये । उसने प्रलय कॉमिक्स में नागराज को भी हरा दिया मुझे तो मजा ही आ गया था । ध्रुव की दो या तीन ही कॉमिक्स उस समय पढ़ने को मिली पर उन कॉमिक्स में मैंने देखा कि एक नीली पीली ड्रेस पहने एक साधारण सा लड़का अपनी मोटरसाईकिल के साथ सड़कों पर घूमता और अपने दिमाग  और पशु पक्षियों के सहारे - महामानव और किरीगी जैसे इतने शक्तिशाली विलेन को धुल चटा रहा था। वो अलग था सबसे जुदा बिना शाक्तियों वाला शाक्तिशाली हीरो।
फिर  मैं और जितेन्द्र ने किराये पर लाई कई कॉमिक्स पढ़ी और कई सारी वापस ही नहीं की हीहीहीही । अब हम केवल नागराज और ध्रुव की ही कॉमिक्स पढ़ते थे जब इनकी कोई कॉमिक्स नहीं मिलती तो हम परमाणु और एंथोनी  , तिरंगा और मेरे दूसरे फेवरिट योद्धा की कॉमिक्स भी पढ़ लेते । मेरी आज तक की फेवरिट सीरीज नागराज और ध्रुव की ड्रैकुला की लड़ाई वाली सीरीज है नागराज का मानस रूप गजब था इसी बीच ध्रुव को भी श्वेता ने नये गैजेट देकर उसको अपग्रेड कर दिया था। हम हर साल नानी जी के घर जाते और पूरे साल का इकट्ठा किया पेपर लोहा इत्यादि बेचकर उनसे मिले रूपये की कॉमिक्स पढ़ते काफी अच्छे थे वो दिन । कोलाहल कॉमिक्स के बाद मेरा कॉमिक्स कनेक्शन टूट गया , मैंने इस बीच कुछ कॉमिक्स पीडीएफ वर्जन में किसी से खरीद रखी थी वो मैं समय समय पर पढ़ लेता था और फिर इस साल 2017 में राज कॉमिक्स का ऐप वर्जन रिलीज हुआ मुझे बहुत खुशी हुई । मैंने ऐप को डाउनलोड कर लिया और मुझे इस बात की हमेशा से खुशी होगी कि मैंने ऐप को पहले ही दिन डाउनलोड किया । राज कॉमिक्स वालो ने वाट्सऐप पर ग्रुप बनाया मैं उसमें जुड़ा वहां पर पायरेसी वालों की क्लास लग रही थी । मेरे पास भी कई कॉमिक्स थी मां कसम डर गया पर जो कॉमिक्स मेरे पास थी वो मैंने डिलीट नहीं की । मैं उस ग्रुप में शांत ही रहा । कुछ दिन बाद कबीर नाम का शक्स वाट्सऐप ग्रुप में आया और मेरे साथ कई लोगों को एफएमसी नामक ग्रुप में ज्वाइन कराया वो दिन है और आज का दिन है ग्रुप का सभ्यपन और कॉमिक्स सम्बन्धित बातों ने मेरे दिल को छू लिया यहां मुझे बलविन्दर भाई , हुकुम महेंद्र , मी , डेडपूल दीपक जी जैसे कॉमिक्स के ऐसे धुन्धर मिले की मुझे पता चला की मैं अकेला नहीं जिसे कॉमिक्स से प्रेम है यहां तो ऐसे भी लोग हैं जो मेरे से हजारों गुना ज्यादा कॉमिक्स के दीवाने और कला के धनी है । मुझे इस ग्रुप से कॉमिक्स सम्बन्धी हर करैक्टर सम्बन्धी कोई भी जानकारी चाहिए होती है तो मुझे यहां तुरन्त जानकारी मिल जाती है यहां पायरेसी नहीं होती बल्कि कॉमिक्स के श्रान का आदान प्रदान होता है वो भी सभ्य और अच्छे से अच्छे शब्दों में मैँ यहां हिन्दी में कम लिखता हुं किस लिए ये बताउं 
वो इसलिए क्योंकि मेरे से ज्यादा अच्छी हिन्दी बोलने वाले और लिखने वाले यहां है और मैं अपने खराब मात्राऔं को यहां लिखकर ग्रुप की शोभा नही खराब करना चाहता । कॉमिक्स पढ़ने और इस जुनून को आगे बढ़ने का जो कुछ भी कार्य मुझे भविष्य में करने का अवसर मिलेगा वो मैं सहर्ष करुंगा।

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बात कॉमिक्स प्रेम की
बॉबी कश्यप 
खटीमा, उत्तराखंड



कहते है बचपन हर दिल से बेगाना होता है और बचपन की याद कभी भुलाई नहीं जाती । कॉमिक्स प्रेम भी कुछ ऐसा ही है जो हम आज भी भूल नहीं सकते मित्रों तो अब बात आपने कॉमिक्स प्रेम की मैंने जो कॉमिक्स सबसे पहले पड़ी थी वो थी आंगरा अंतरिक्ष मे आंगरा की कहानी बहुत बढ़िया और प्रदीप साठे जी का बेमिसाल आर्टवर्क उनके बनाये हुए चित्र मुझे कॉमिक्स की और बराबर आकर्षित करते रहे  और आज भी आंगरा की कॉमिक्स मुझे सबसे जाएदा पसंद है । आंगरा के बाद जो केरेक्टर मुझे अच्छा लगता है तो वो मेरी फेवरेट राज कॉमिक्स से आता है ।
डोगा -डोगा जब से कॉमिक्स की दुनिया मैं आया है तब से आज तक मेरी पहली पसंद बना हुआ है कर्फ्यू ,ये है डोगा ,मैं हूँ डोगा अदरक चाचा और मुकाबला इन कॉमिक्स ने जो मनोरंजन दिया वो जादू आज भी बरकार है । कॉमिक्स प्रति दीवानगी कहूँ या प्यार मेरे लिये ये बहुत बड़ी बात है ऐसे कई मौके आये है जब पापा ने कॉमिक्स की वजह से खूब जमकर पिटाई भी की थी और कई बार मेरे जमा की गई कॉमिक्स को रद्दी मैं दे दी थी । उन सब बातों के बाद भी मैंने कॉमिक्स पड़ना नही छोड़ा और लगातार मैं कॉमिक्स इकट्ठा करता और पापा हर बार की इकट्ठी की हुई कॉमिक्स मेरे सामने वाली दुकान मैं दे देते थे । इन सब बातों से दुखी होकर एक बार मेने आपने पास जितनी भी कॉमिक्स थी सब आपने सामने वाली दुकान मैं दे दी , फिर जो हुआ वो काफी उलट था पापा और मम्मी ने वो सारी कॉमिक्स मुझे लाकर दी और ये कहा अब ये सब कॉमिक्स हमारी है और इन्हें किसी को मत देना । इसके बाद मैंने बहुत समय तक कॉमिक्स पड़ना छोड़ दिया मेरे इसके प्रति प्यार को देखकर आखिरकार मुझे इसकी अनुमति भी दी । 2007 मैं फिर से राज कॉमिक्स से जुड़ा और राज कॉमिक्स कुछ बेहतरीन कॉमिक्स पड़ने को मिली और तब से आज तक ये सफर आज भी जारी है और आगे भी जारी रहेगा .............

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2 comments:

  1. Good bro....

    मुझे आज भी याद है मैंने सबसे पहली कामिक्स बांकेलाल और तिलिस्मदेव पढ़ी थी

    पर तब की कामिक्स स्टोरीज और आज की स्टोरीज में बहुत फर्क है

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